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SMOG POLLUTION MEANING DEFINITION PREVENTION HINDI

स्मोग से कैसे बचे | SMOG POLLUTION MEANING DEFINITION PREVENTION HINDI

स्मोग से कैसे बचे

SMOG POLLUTION MEANING DEFINITION PREVENTION HINDI

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स्मोग एक तरह का वायु प्रदूषण प्रकार है. स्मोग शब्द 1900 में इस्तेमाल किया गया जिसका मतलब है स्मोग मतलब धुएं और फोग यानि कोहरे का मिश्र रूप. आजकल स्मॉग के कारण बहुत सारी स्वास्थ्य समस्याएं हो रहीं हैं. आंखो की जलन और सांस लेने में भी दिक्कत इत्यादी स्मोग की वजह से हो रहा है.

स्मॉग है क्या?

गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाली खतरनाक गैस, धुएं और कोहरे के मेल से स्मॉग बनता है. स्मॉग का असर हवा में कई दिनों तक हो सकता है. तेज हवा चलने या बारिश के बाद ही स्मॉग का असर खत्म होता है. स्मॉग वो ज़हर है जो किसी को भी बहुत बीमार बना सकता है. स्मॉग गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले धुएं में मौजूद राख, सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य खतरनाक गैसें जब कोहरे के संपर्क में आती हैं तो स्मॉग बनता है. जो कि कई दिनों तक रहता है.

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समझें बुरी हवा को प्रदूषित हवा की वजह से होने वाली परेशानी से निपटने के लिए सबसे पहले जरूरी है समस्या को समझना और उसके हिसाब से एक्शन लेना. सबसे पहले तो यह समझना पड़ेगा कि क्या है जो हमारे आस-पास की हवा को खराब कर रहा है. – गाड़ियों से निकलता धुंआ. – रिहाइशी इलाकों में इंडस्ट्रियल सेटअप. – कूड़ा-करकट और फसलों को जलाना. – बढ़ते शहरों में होने वाला लगातार कंस्ट्रक्शन कौन हैं हमारी हवा के विलेन

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हवा में मौजूद ये आठ विलेन परेशानी का सबब बन रहे हैं:

PM10 (पीएम का मतलब होता है पार्टिकल मैटर. इनमें शामिल है हवा में मौजूद धूल, धुंआ, नमी, गंदगी आदि जैसे 10 माइक्रोमीटर तक के पार्टिकल. इनसे होने का वाला नुकसान ज्यादा परेशान करने वाला नहीं होता ) PM2.5 (2.5 माइक्रोमीटर तक के ये पार्टिकल साइज में बड़े होने की वजह से ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं) NO2 (नाइट्रोजन ऑक्साइड, यह वाहनों के धुंए में पाई जाती है) SO2 (सल्फरडाई ऑक्साइड गाड़ियों और कारखानों से निकलने वाले धुंए से निकल कर यह फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है) CO (कार्बनमोनो ऑक्साइड, गाड़ियों से निकल कर फेफड़ों को घातक नुकसान पहुंचाता है) O3 (ओजोन, दमे के मरीज और बच्चों के लिए बहुत नुकसानदेह ) NH3 (अमोनिया, फेफड़ों और पूरे रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिए खतरनाक) Pb (लेड, गाडियों से निकलने वाले धुंए के आलावा मेटल इंडस्ट्री से भी निकल कर यह लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला सबसे खतरनाक मेटल)

Sourcs: navbharattimes

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स्मॉग से होने वाली बीमारियां

खांसी
दिल की बीमारी
त्वचा सम्बन्धी रोग
बालों का झड़ना
नाक, कान, गला में इन्फेक्शन
सांस लेने में दिक्कत
ब्रेन स्ट्रोक

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ऐसे करें स्मॉग से बचाव

  • स्मोक कम से कम हो इसके लिए वाहनों से निकलने वाले धुंए को कंट्रोल करना पड़ेगा.
  • बीमार हों या स्वस्थ, स्मॉग में बाहर न निकलें. अगर निकलना ही पड़े तो मास्क लगा कर निकलें.
  • सुबह के वक्त काफी स्मॉग रहता है. इसकी वजह अक्सर रात के वक्त वातावरण में जमा धुंए का न छंट पाना होता है जो सुबह की धुंध में मिल कर स्मॉग बना देता है.
  • सर्दियों में ऐसा अक्सर होता है इसलिए बेहतर होगा भोर (5-6 बजे) की बजाय धूप निकलने के बाद (तकरीबन 8 बजे) वॉक पर जाएं.
  • सर्दियों में जहां वायु प्रदुषण ज्यादा रहता है वहीं लोग पानी भी कम पीते हैं. यह खतरनाक साबित होता है. दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पिएं.
  • प्यास लगने का इंतजार न करें कुछ वक्त के बाद 1-2 घूंट पानी पीते रहें.
  • घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं. इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसे अगर ब्लड तक पहुंच भी जाएंगी तो कम नुकसान पहुंचा पाएंगी.

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  • नाक के भीतर के बाल हवा में मौजूद बड़े डस्ट पार्टिकल्स को शरीर के भीतर जाने से रोक लेते हैं. हाईजीन के नाम पर बालों को पूरी तरह से ट्रिम न करें. अगर नाक के बाहर कोई बाल आ गया है तो उसे काट सकते हैं.
  • बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें. हो सके तो भाप लें. – अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और रेग्युलर लें.
  • साइकल से चलने वाले लोग भी मास्क लगाएं. चूंकि वे हेल्मेट नहीं लगाते इसलिए उनके फेफड़ों तक बुरी हवा आसानी से पहुंच जाती है. – ज्यादा एयर पल्युशन
  • अब डॉक्टर के पास जाएं किसी भी परेशानी की शुरुआत होने पर ही अगर उसकी जांच करा ली जाए तो समस्या बनने से पहले इलाज मुमकिन है.
  • इन लक्षणों के होते ही ध्यान दें: – सांस लेने में तकलीफ होने पर या सीढ़ियां चढ़ते या मेहनत करने पर हांफने लगने पर – सीने में दर्द या घुटन महसूस होने पर – 2 हफ्ते से ज्यादा दिनों तक खांसी आने पर – 1 हफ्ते तक नाक से पानी या छींके आने पर – गले में लगातार दर्द बने रहने पर

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  • इनको जरा बचा कर रखें बच्चे – 5 साल से कम बच्चों की इम्युनिटी काफी कमजोर होती है इसलिए उन्हें एयर पल्युशन से रिस्क ज्यादा होता है. इसलिए सर्दियों में उन्हें सुबह वॉक के लिए न ले जाएं.
  • बच्चों को मैदान में खिलाने की बजाए इनडोर ही खिलाएं.
  • धूल भरी और भारी ट्रैफिक वाली मार्केट्स में बच्चों को ले जाने से बचें.
  • उम्रदराज लोगों को बिगड़ती हवा काफी परेशान कर सकती है. – पल्युशन लेवल बढ़ने पर बाहर जाने से बचें. – धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें.
  • सर्दी के मौसम में ज्यादा एक्सरसाइज (ब्रिस्क वॉक या जॉगिंग आदि) न करें.
  • प्राणायाम और योग करना ही काफी होगा.
  • जरूरी नहीं है कि फिजिकल एक्सरसाइज से ही आप फिट रह सकते हैं. आप इसके लिए योगा को भी अपना सकते हैं. योग करने के लिए घर के बाहर जाने की भी जरुरत नहीं . इसलिए योग भी करते रहिये .
  • एयर प्यूरिफायर करेगा मदद, घर के भीतर की हवा को साफ रखने के लिए इनका सहारा लिया जा सकता है.

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कौन सा मास्क खरीदें

साधारण हरे या नीले क्लीनिकल मास्क ज्यादा काम के नहीं होते और लगभग हर तरह के एयर पल्युशन के सामने बेअसर रहते हैं. – अगर सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो तो मास्क लेने के लिए डॉक्टर से भी राय ली जा सकती है. – वैसे मार्केट में Vogmask, Neomask, Totobobo, Respro, Venus और 3M जैसी कंपनियों के मास्क अच्छे माने जाते हैं. – क्वॉलिटी के हिसाब से इनकी कीमत 150 रुपये से 5000 रुपये तक हो सकती है.

SOURCE: internet

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